छत्तीसगढ़

बालिका सुरक्षा, विपरीत लिंग आकर्षण पर प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित

Shantanu Roy
13 Nov 2025 10:38 PM IST
बालिका सुरक्षा, विपरीत लिंग आकर्षण पर प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित
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छग
Janjgir-Champa. जांजगीर-चांपा। कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना अंतर्गत शासकीय इंद्रजीत महाविद्यालय अकलतरा, आईटीआई अकलतरा और बलौदा में बालिका सुरक्षा, विपरीत लिंग आकर्षण, तनाव प्रबंधन और सोशल मीडिया के उपयोग-दुरूपयोग विषय पर प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य बालिकाओं के प्रति सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देना, उनके लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना, लिंग आधारित
भेदभाव
और हिंसा को रोकना तथा बालिकाओं के अस्तित्व और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही, बालिकाओं को उनके शैक्षणिक और सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाना भी इस कार्यशाला का उद्देश्य था। कार्यशाला में छात्राओं के बीच “मेरे सपनों का भविष्य - मैं भविष्य में क्या बनना चाहती हूँ”, परिवार में बेटियों के अधिकार, बालिकाओं की समाज में भूमिका और “बेटियाँ ही भविष्य हैं” विषय पर भाषण, कविता और निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इससे छात्राओं में आत्मविश्वास और समाज में अपनी भूमिका के प्रति जागरूकता पैदा हुई।

कार्यशाला के दौरान साइबर सुरक्षा, साइबर बुलिंग, सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग, आवेग नियंत्रण, तनाव प्रबंधन, हेल्पलाइन नंबर और कानूनी अधिकारों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। छात्रों को बताया गया कि सोशल मीडिया का दुरूपयोग मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक प्रतिष्ठा पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है और इसके सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता है। कार्यक्रम में रजनी साहू, परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना अकलतरा; राजेश्वरी पाटले, सुपरवाइजर्स; सखी वन स्टॉप सेंटर जांजगीर केन्द्र की प्रशासक एच. निशा खान; सायको-सोशल-काउंसलर सरस्वती सोनी; चाइल्ड लाइन केसवर्कर डानी केसरवानी; शिक्षकगण और बड़ी संख्या में लाभार्थी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। जिला अधिकारी ने सभी
प्रतिभागियों
को निर्देशित किया कि वे बालिकाओं के प्रति संवेदनशील और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं। साथ ही, बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करने की जिम्मेदारी भी परिवार और समाज दोनों की है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम बच्चों और अभिभावकों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ समाज में लिंग समानता और सुरक्षा की भावना को मजबूत करते हैं। कार्यशाला के अंत में उपस्थित छात्राओं और अभिभावकों ने कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ उन्हें न केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करती हैं, बल्कि उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाती हैं। इस प्रशिक्षण सह कार्यशाला ने बालिकाओं के संरक्षण, लिंग समानता, मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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